ये जो छेद डिस्क ब्रेक में है वो हमेसा से नही होते थे। पुराने जमाने मे जब डिस्क ब्रेक बनाये गए, उस समय डिस्क ब्रेक सिर्फ एक मोटी गोल प्लेट की तरह होते थे। ये प्लेट अभी इस्तेमाल होने वाली प्लेट से ज्यादा मोटी होती थी। लेकिन मोटी प्लेट के साथ समस्या थी कि ये बहुत भारी होती थी और ब्रेक लगाने के बाद बहुत गर्म हो जाया करती थी। यदि आप नीचे वाला चित्र देखे तो समझ जाएंगे कि एक डिस्क ब्रेक कैसे काम करता है -
डिस्क पहिये के साथ जुड़ी रहती है। जब हम ब्रेक लगाते है तो ब्रेकिंग पैड, डिस्क प्लेट पर बल लगाते है। चूंकि ब्रेकिंग पैड डिस्क प्लेट को घिसता है। इसलिए बहुत ज्यादा गर्मी बनती है।
एक मोटी प्लेट जब डिस्क ब्रेक में इस्तेमाल की जाती थी तो प्लेट घर्षण के कारण बनी गर्मी से काफी देर तक गर्म रहती थी। फिर किसी ने सोचा कि क्यों न हम एक पतली प्लेट ले जो जल्दी ठंडी जो जाए। इससे प्लेट का वजन भी कम हो जाएगा। लेकिन इस पतली प्लेट में भी एक समस्या थी कि ब्रेक लगाने पर ये गर्मी से पिघल जाती थी।
इसलिए समस्या का समाधान उस प्लेट में छोटे छोटे छेद बनाकर किया गया। इससे फायदा ये हुआ कि प्लेट का वजन भी कम हुआ और छेद के कारण प्लेट ठंडी भी जल्दी होने लगी। इन छेदो से हवा निकलकर ऊष्मा स्थान्तरण (Heat Transfer) की गति प्लेट के बीच कम करती है।
इन छेद का एक फायदा ये भी है कि बरसात के समय में जब डिस्क ब्रेक में पानी चला जाता है तो उसकी ब्रेकिंग पावर कम हो जाती है। ये छेद उस पानी को भी साफ कर देते है।